एनरिको फिर्मी की शिक्षा पर चर्चा!

By | September 5, 2019

प्राचीन ज्ञान-विज्ञान के महानतम् केंद्र रोम में जन्मे इस महान वैज्ञानिक का परिवार रोम के समृद्ध परिवारों में था। बचपन में वे बहुत प्रतिभाशाली छात्र थे। मात्र 21 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने पीसा विश्वविद्यालय से भौतिकी-विज्ञान में एक्स किरणों के क्षेत्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली थी!

26 वर्ष की उम्र में वे रोम विश्वविद्यालय में भैतिकी के प्राध्यापक नियुक्त किए गए। वे इतने योग्य व्यक्ति थे कि सन् 1929 में उन्हें इटली अकादमी का सदस्य चुना गया। यह किसी नागरिक को दिया जाने वाला इटली का महानतमू सम्मान है। सन् 1934 में 10 वर्ष तक कठिन परिश्रम करके उन्होंने एक मूलभूत खोज की। उन्होंने पता लगाया कि जब तत्त्वों पर धीमी गति के न्यूट्रॉनों की बौछार की जाती है तो पदार्थ रेडियो-धर्मी हो जाता है तथा इससे विकिरण होने लगता है। इस प्रक्रियामें एक तत्त्व दूसरे तत्त्व में बदल जाता है। सन् 1933 में उन्होंने न्यूट्रॉनो नामक मूल पदार्थ की परिकल्पना की। न्यूट्रॉनों द्वारा बौछार करके फर्मी ने 80 नए कृत्रिम नाभिक (Nucleus) बनाए!

वस्तुतः एनरिको फर्मी को नाभिकीय क्रियाओं (Nuclear Reactions) की खोज का जन्मदाता कहा जाता है। वास्तव में वे परमाणु ऊर्जा के जन्मदाता कहे जाते हैं क्योंकि उन्होंने ही सबसे पहले नाभिकीय श्रृंखला प्रक्रियाओं का आविष्कार किया
था!

विज्ञान के महापुरुष के सम्मान में एक तत्त्व का नाम फर्मियम (Fermium) रखा गया। अमरीकी सरकार ने उनके सम्मान में फर्मी पुरस्कार की स्थापना की, जिसे प्रतिवर्ष विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण कार्य के लिए अमरीकी वैज्ञानिकों को दिया जाता है। आधुनिक विश्व के अनेक देशों में नाभिकीय भट्ढियां (Nuclear Reactors) हैं, जो भांति-भांति के समस्थानिकों (lsotopes) बनाने और विद्युत उत्पादन के लिए प्रयोग किए जा रहे हैं। इन सभी नाभिकीय भट्टियों के स्वरूप में थोड़ा-बहुत परिवर्तन अवश्य आया है लेकिन मूल सिद्धांत अभी भी वही है, जो फर्मी ने प्रतिपादित किया था!

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