अलैक्जेंडर ग्राहम बेल शिक्षा पर चर्चा कीजिये!

By | September 6, 2019

आज का युग संचारक्रांति का युग है। हजारों मील दूर बैठा कोई अपना जब हमारी या हम उसकी आवाज सुनते हैं तो अभिभूत हो जाते हैं। टेलीफोन के कारण आज दुनिया बहुत छोटी हो गई है। हालांकि आज टेलीफोन के अत्यंत उन्नत स्वरूप हमारे सामने हैं लेकिन इसके आविष्कार का श्रेय जाता है अलैक्जेंडर ग्राहम बेल को! बेल का जन्म एडिनबरा (स्कॉटलैंड) में 3 मार्च, 1847 को हुआ था। उनका पालन-पोषण बोस्टन (मैसाचुसैट्स) में हुआ। 25 वर्ष की उम्र में बेल ने बोस्टन में गूंगे-बहरों की शिक्षा के लिए स्कूल खोला। उन्होंने अपने खाली समय में ऐसे यंत्रों पर काम करना शुरू किया जो बहरे बच्चों को सुनने में मदद कर सकें। उन्हें इस क्षेत्र में तो कोई सफलता नहीं मिली लेकिन इन प्रयोगों के आधार पर वे टेलीफोन बनाने में सफल हो गए!

इस महत्त्वपूर्ण यंत्र के आविष्कार की कहानी भी बड़ी मनोरंजक है। टेलीफोन के आविष्कार से पहले जब वे टेलीग्राफ में सुधार करने में लगे हुए थे तब वे एक दिन एक कारखाने में गए। वहां उनकी मुलाकात विद्युत इंजीनियर थॉमस वाटसन से हुई। वाटसन भी टेलीग्राफी में काफी कुशल थे। कुछ ही दिनों में उन दोनों में खूब पटने लगी। बेल अपने यंत्रों के नक्शे बनाते तो वाटसन उनके मॉडल। प्रयोग करते-करते आखिर 2 जून, 1875 का दिन भी आ ही पहुंचा, जिस दिन उन्हें टेलीफोन बनाने में सफलता मिली!

सन् 1915 तक टेलीफोन व्यवस्थाओं में इतना सुधार हो गया था कि 3,400 मील लम्बी समुद्रतटीय लाइन बनाई जा चुकी थी। इस लाइन का उद्घाटन करने के लिए न्यूयॉर्क से बेल को बुलाया गया। बेल ने कहा कि इस उद्घाटन के समय दूसरे सिरे पर वाटसन को होना चाहिए। जब उद्घाटन हुआ तो बेल ने वही शब्द दोहराये कि “वाटसन कृपया यहां आना मुझे आपकी जरूरत है!

इसके जवाब में दूसरी तरफ से वाटसन की हंसी की आवाज सुनाई दी। वाटसन कह रहे थे कि “श्रीमान मैं आप तक आने में इस समय मजबूर हूं क्योंकि मैं आपसे इतनी दूर हूं कि मुझे आप तक पहुंचने में एक सप्ताह लगेगा।” खेल एक बहुत ही नम्र व्यक्ति थे। उन्हें अपने इस महान आविष्कार का कभी अभिमान नहीं हुआ। 75 वर्ष की आयु में सन् 1922 में जब ग्राहम बेल की मृत्यु हुई तो समस्त अमरीका में उनकी स्मृति में एक मिनट तक टेलीफोन बंद रहे!

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