विल्हेल्म कॉनराड रोंटजन की जीवन शिक्षा!

By | September 6, 2019

विल्हेल्म सेंटजन का जन्म जर्मनी के लेनेप नामक स्थान पर 27 मार्च, 1845 में हुआ था। इनके पिता एक कृषक थे और मां डच महिला थीं। इनकी आरम्भिक शिक्षा हॉलैण्ड में हुई तथा उच्च शिक्षा स्विटजरलैण्ड के ज्यूरिख विश्वविद्यालय में हुई। यहीं से उन्होंने 24 वर्ष की आयु में पी.एच.डी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कई विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया। सन् 1885 में वे बुर्जबर्ग विश्वविद्यालय में भौतिकी के प्रोफेसर पद पर नियुक्त किए गए। यहीं उन्होंने 1895 में एक्स किरणों का आविष्कार किया। एक्स किरणों के उपयोगों ने आज सारे संसार में तहलका मचा रखा है!

इन किरणों के आविष्कार की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। प्रोफेसर सेंटजन अपनी प्रयोगशाला में एक विद्युत विसर्जन नलिका अर्थात कैथोड रे ट्यूब पर कुछ प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने पर्दे गिराकर प्रयोगशाला में अंधेरा कर रखा था और इस नलिका को काले गत्ते से ढक रखा था। सेंटजन ने देखा कि नलिका के पास में ही रखे कुछ बैरियम प्लेटीनो साइनाइड के टुकड़ों से एक प्रकार की प्रकाशीय चमक निकल रही है। तब उन्होंने चारो ओर देखा तो पाया कि उनकी मेज से कुछ फुट की दूरी पर एक प्रतिदीप्तिशील पर्दा भी चमक रहा है। यह देखकर उनकी हैरानी का ठिकाना न रहा क्योंकि नली तो काले गत्ते से ढकी हुई है और कैथोड किरणों का बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं है। उन्हें यह विश्वास हो गया कि निश्चय ही नलिका से कुछ अज्ञात किरणें निकल रही हैं, जो मोटे कागज से भी पार हो सकती है!

अनुसंधान प्रयोगशालाओं में एक्स किरणों की सहायता से मणिभों की संरचना का पता लगाया जाता है। कुछ ही वर्ष पूर्व इन किरणों को प्रयोग में लाकर कैट-स्कैनर नामक मशीन विकसित की गई है, जिससे शरीर की आंतरिक बीमारियों का पता पलव्भर में लग जाता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि रोटजन द्वारा खोजी गई ये किरणें हमारे लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुई हैं!

प्रोफेसर रोटजन ने एक्स-किरणों के अतिरिक्त और भी कई अनुसंधान किए। वे एक महान भौतिक शास्त्री थे। उन्होंने घूर्णन करते कुछ विशिष्ट पदार्थों पर चुम्बकीय प्रभावों से सम्बंधित प्रयोग किए। मणिभों के साथ उन्होंने कुछ विद्युत सम्बंधी प्रयोग भी किए। अंत में वे बुर्जबर्ग से म्यूनिख आ गए और 77 साल की उम्र में इसी शहर में उनका देहांत हो गया!

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