थॉमस अल्वा एडिसन के बारे में चर्चा!

By | September 7, 2019

एक साथ वैज्ञानिक, उत्तम व्यवस्थापक एवं उद्यमी की विशिष्ट प्रतिभा रखने वाले महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडीसन का जन्म 11 फरवरी, 1847 को मिलान में हुआ था। इनके पिता ने हर प्रकार के व्यवसाय करने का प्रयास किया लेकिन उन्हें किसी में भी सफलता न मिली। एडीसन बचपन में बहुत ही कमजोर थे और उनका व्यक्तित्त्व बहुत ही जटिल था। लेकिन इनका मस्तिष्क सदा प्रश्नों से भरा ही रहता था। वह किसी भी चीज को तब तक नहीं मानते थे जब तक कि उसका स्वयं परीक्षण न कर लें। इस प्रकार के दृष्टिकोण के कारण ही इन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। इनके अध्यापक ने कहा था कि इस लड़के का दिमाग बिल्कुल खाली है। स्कूल से निकाले जाने के बाद इन्हें इनकी मां ने, जो स्वयं एक अध्यापिका थीं, पढ़ाया!

दस साल की उम्र में ही इन्होंने अपने घर के तहखाने में एक प्रयोगशाला बना ली थी। अपने प्रयोगों के लिए जब इन्हें अधिक धन की आवश्यकता हुई तो इन्होंने ग्रांड ट्रंक रेलवे पर चलती हुई रेलगाड़ियों में अखबार, टाफी बेचना आरम्भ कर दिया। इन्होंने यह कार्य लगभग एक वर्ष तक किया और इसी अवधि में एक साधारण किस्म का टेलीग्राफ भी बनाया!

सन् 1861 में उत्तर और दक्षिण के बीच में युद्ध छिड़ गया। लोगों की उत्सुकता थी कि उन्हें युद्ध के विषय में समाचार जल्दी से जल्दी मिलें । इस आवश्यकता को देखते हुए एडीसन ने एक समाचार पत्र छापने की योजना बनाई। उन्होंने 12 डॉलर में एक पुराना छापाखाना खरीदा और उसे ट्रेन में ही लगा दिया। कुछ कागज खरीदकर उन्होंने समाचार पत्र छापना आरम्भ कर दिया। इस समाचार पत्र का नाम था ग्रांड धेरल्ड। यह विश्व का पहला ऐसा समाचार पत्र था जो एक रेलवे ट्रेन में छापा जाता था और वहीं से बांटा जाता था। इस समाचार पत्र के लगभग 400 खरीदार टसी अवधि में इन्होंने रेलगाड़ी के डिब्बे में एक छोटी-सी प्रयोगशाला भी बना ली थी, जिसमें यह अपने खाली समय में कुछ न कुछ प्रयोग करते रहते थे!

सन् 1912 में इन्हें अपने पुराने सहयोगी टेस्ला के साथ नोबेल पुरस्कार मिलने को था लेकिन टेस्ला अपना नाम एडीसन के साथ जोड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए ये दोनों ही वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार से वंचित रह गए। अपने जीवन के अंतिम दशक में वे तकनीकी युग के जादूगर के रूप में प्रसिद्ध हो गए थे। वे जीवन की अंतिम सांसों तक (18 अक्टूबर, 1931) भी नयी चीजें खोजने में लगे रहे। इतनी महान प्रसिद्धि के बावजूद भी वे बहुत सरल स्वभाव के थे। यह बात उनके इस कथन से स्पष्ट हो जाती है—‘मेरे अंदर एक प्रतिशत विद्वता का उत्साह रहा लेकिन 99 प्रतिशत कठिन परिश्रम का।’ सन् 1960 में उनका नाम अमरीका के उन प्रसिद्ध व्यक्तियों की सूची में जोड़ा गया जिन्हें ‘मैम्बर ऑफ द हॉल ऑफ फेम’ कहते हैं!

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