ईवान पैवलोव की शिक्षा पर चर्चा करे!

By | September 8, 2019

पैवलोव का जन्म 14 सितम्बर, 1849 को मध्य-रूस के एक छोटे-से कस्बे रियाजान में हुआ था। पिता गांव के एक पादरी थे। मां-बाप ने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित ही नहीं किया, अपितु विषय के चुनाव में भी उसे पूर्ण स्वतंत्रता दी!
पैवलोव की शिक्षा का आरम्भ एक धार्मिक पाठशाला में हुआ जहां एक पादरी शिक्षक की छत्रछाया में बालक में विज्ञान के प्रति अभिरुचि जाग्रत हुई!

पाठशाला के बाद पैवलोव सेंट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ नैचुरल साइंसेज में दाखिल हुए। यहां एक पुस्तक ‘मस्तिष्क की स्वाभाविक प्रतिक्रियाएं उनके हाथ लगीं, जिसने उनका भविष्य निर्धारित कर दिया। पुस्तक का विषय था—‘मनुष्य की शारीरिक तथा मानसिक क्रियाओं में परस्पर सम्बंध।’ पैवलोव ने निश्चय किया कि बड़ा होकर वह एक डॉक्टर बनेगा—शरीर विज्ञान का प्रोफेसर। 1879 में उसकी चिकित्सक बनने की शिक्षा-दीक्षा समाप्त हो गई। सैनिक चिकित्सा एकेडमी से स्नातक होकर, बचपन में लिए अपने व्रत के अनुसार, पैवलोव ने सेंट पीटर्सबर्ग में एक प्रयोगशाला स्थापित की ताकि वह शरीर-तंत्र सम्बंधी अनुसंधान को अनवरत रख सके!

प्रयोगशाला बहुत ही साधन-विहीन थी। कोई नियमित सहायक नहीं, और जो थोडे-बहुत साधन उपकरण आवश्यक होते वे भी पैवलोव को खुद अपनी थोड़ी-सी तनख्वाह के अंदर ही जुटाने पड़ते। किंतु वे घबराए नहीं, अपने ध्येय की पूर्ति में लगे ही रहे। धीरे-धीरे, आसपास उनका कुछ नाम भी होने लग गया। 41 वर्ष की आयु में उनकी नियुक्ति मैडिकल एकेडमी में फॉर्मेकॉलोजी के प्राध्यापक के रूप में हो गई। एक वर्ष पश्चात उन्हें सेंट पीटर्सबर्ग के प्रयोगात्मक विधि संस्थान में खुली नई प्रयोगशाला का अध्यक्ष भी बना दिया गया!

पैवलोव को पहले-पहल अंतर्राष्ट्रीय सम्मान उनके पाचन-संस्थान सम्बंधी अनसंधानों पर मिला था। 1904 में उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया। शरीर के नाडी-तंत्र में तथा पाचनतंत्र में परस्पर सम्बंध क्या होता है यह उन्होंने सिद्ध कर दिखाया। वैसे, पैवलोव का विश्वास था कि शरीर की सभी क्रियाएं-प्रतिक्रियाएं हमारे नाडी-तंत्र द्वारा ही चालित होती हैं। तब तक वैज्ञानिकों को यह मालूम नहीं था कि पाचन-क्रिया में कुछ महत्त्वपूर्ण योग हार्मोन्स का भी हुआ करता है!

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